रायपुर। छत्तीसगढ़ कांग्रेस में लंबे समय से खाली पड़े महत्वपूर्ण संगठनात्मक पदों को लेकर अब तस्वीर साफ होने लगी है। करीब ढाई साल बाद प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) को स्थायी कोषाध्यक्ष मिलने की संभावना है। नए कोषाध्यक्ष के लिए नाम कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व को भेज दिया गया है और अब एआईसीसी की मंजूरी के बाद नियुक्ति की घोषणा हो सकती है। इसके साथ ही प्रदेश कांग्रेस संगठन के ढांचे में भी बड़ा बदलाव प्रस्तावित है। संयुक्त महासचिव समेत करीब 35 पदों को खत्म कर प्रदेश कांग्रेस की नई टीम को करीब 200 पदाधिकारियों तक सीमित करने की तैयारी है।

नई कार्यकारिणी में केवल पदों की संख्या कम करने पर ही जोर नहीं है, बल्कि चेहरों में भी बदलाव की तैयारी है। संगठन में युवा, महिला और सक्रिय नेताओं को अधिक प्रतिनिधित्व देने की कवायद चल रही है। वहीं लंबे समय से पद संभाल रहे लेकिन संगठनात्मक गतिविधियों में अपेक्षित सक्रियता नहीं दिखा पाने वाले नेताओं की जगह नए चेहरों को मौका दिए जाने की संभावना है।

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रामगोपाल अग्रवाल के बाद अब स्थायी कोषाध्यक्ष की तैयारी

प्रदेश कांग्रेस में कोषाध्यक्ष का पद लंबे समय से चर्चा में रहा है। पिछली व्यवस्था में रामगोपाल अग्रवाल इस पद की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। बाद में ईओडब्ल्यू और ईडी से जुड़ी कार्रवाई के बाद उनकी संगठनात्मक सक्रियता कम हुई। हालांकि, उन्हें पद से हटाए जाने का कोई स्पष्ट सार्वजनिक आदेश सामने नहीं आया। फिलहाल मलकीत सिंह गेंदू प्रभारी कोषाध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। अब स्थायी कोषाध्यक्ष के लिए नाम एआईसीसी को भेजे जाने के बाद केंद्रीय नेतृत्व के फैसले का इंतजार है। कोषाध्यक्ष का पद संगठन के वित्तीय प्रबंधन से सीधे जुड़ा होने के कारण कांग्रेस के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में करीब ढाई साल बाद स्थायी नियुक्ति को संगठनात्मक दृष्टि से अहम बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।

PCC में 35 पदों की होगी छंटनी

स्थायी कोषाध्यक्ष की नियुक्ति के साथ प्रदेश कांग्रेस की नई कार्यकारिणी का स्वरूप भी बदलने की तैयारी है। संगठन में संयुक्त महासचिव के पद को समाप्त करने का प्रस्ताव है। इसके अलावा सचिव और कुछ महामंत्री स्तर के पदों में भी कटौती किए जाने की बात सामने आ रही है। नई व्यवस्था के तहत प्रदेश कांग्रेस की मुख्य बॉडी में करीब 200 पदाधिकारी होंगे, जबकि मोर्चा, प्रकोष्ठ और विभागों में करीब 31 पदाधिकारियों की व्यवस्था रखे जाने की चर्चा है। यानी नई टीम में पदों की संख्या घटाने के साथ जिम्मेदारियों को अधिक स्पष्ट और प्रभावी बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

नई PCC में क्या बदलने की तैयारी?

  • स्थायी कोषाध्यक्ष: करीब ढाई साल बाद नियुक्ति की तैयारी
  • संयुक्त महासचिव: पद खत्म करने का प्रस्ताव
  • कुल कटौती: करीब 35 संगठनात्मक पद
  • मुख्य PCC: करीब 200 पदाधिकारी
  • फोकस: युवा, महिला और सक्रिय चेहरे
  • आधार: संगठनात्मक कामकाज और प्रदर्शन

पुराने चेहरों की जगह नए लोगों को मौका?

कांग्रेस के संगठन सृजन अभियान के तहत जिला, ब्लॉक और मंडल स्तर पर नई नियुक्तियां की जा चुकी हैं। इन नियुक्तियों में युवाओं को प्राथमिकता देने की कोशिश की गई है। अब इसी मॉडल को प्रदेश कांग्रेस की मुख्य कार्यकारिणी में भी लागू करने की तैयारी है। सूत्रों के मुताबिक नई PCC में पदाधिकारी बनाए जाने के लिए केवल राजनीतिक वरिष्ठता ही आधार नहीं होगी। संगठन में सक्रियता, कामकाज और प्रदर्शन को भी महत्वपूर्ण मानदंड बनाया जा सकता है। लंबे समय से जिम्मेदारी संभाल रहे लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं देने वाले कुछ पदाधिकारियों को नई टीम से बाहर किया जा सकता है। वहीं सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सक्रिय युवाओं को भी संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका देने की तैयारी है। इससे कांग्रेस की नई टीम को पारंपरिक संगठन के साथ डिजिटल राजनीति पर भी अधिक फोकस करने का संकेत मिल रहा है।

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ब्लॉक अध्यक्षों को भी मिलेगी नई ट्रेनिंग

प्रदेश कांग्रेस अब केवल पदाधिकारियों की नियुक्ति तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि संगठन के निचले स्तर को भी प्रशिक्षण देने की तैयारी कर रही है। 30 अगस्त से बस्तर संभाग में ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्षों का प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू होगा। प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार 30 अगस्त से 1 सितंबर तक बस्तर, 5 से 7 सितंबर तक दुर्ग, 10 से 13 सितंबर तक बिलासपुर, 15 से 17 सितंबर तक सरगुजा और 20 से 22 सितंबर तक रायपुर संभाग के ब्लॉक अध्यक्षों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रत्येक ब्लॉक अध्यक्ष के साथ दो मास्टर ट्रेनर्स को भी प्रशिक्षण में शामिल किया जाएगा। प्रशिक्षण में संगठनात्मक गतिविधियों के साथ फील्ड कनेक्ट, सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के प्रभावी इस्तेमाल पर भी जोर दिया जाएगा। इसका उद्देश्य ब्लॉक स्तर तक संगठन को अधिक सक्रिय और आधुनिक तरीके से संचालित करना बताया जा रहा है।

NSUI में 48 घंटे का U-Turn भी चर्चा में

प्रदेश कांग्रेस में संगठनात्मक बदलाव के बीच NSUI की हालिया नियुक्तियों ने भी पार्टी के भीतर हलचल बढ़ाई है। 20 अगस्त को NSUI में चार विधानसभा अध्यक्ष और पांच जिलाध्यक्ष समेत कुल नौ नियुक्तियां की गई थीं, लेकिन 22 अगस्त को सभी नियुक्तियां रद्द कर दी गईं। इनमें पाटन, भानुप्रतापपुर, अंतागढ़ और कांकेर विधानसभा के अध्यक्ष तथा मुंगेली, बालोद, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, बिलासपुर ग्रामीण और बिलासपुर शहर के जिलाध्यक्ष शामिल थे। महज 48 घंटे में नियुक्तियां रद्द होने के बाद संगठन के भीतर इसे लेकर सवाल उठे हैं। हालांकि, नियुक्तियां रद्द करने के पीछे का आधिकारिक कारण स्पष्ट नहीं किया गया है। ऐसे में इसके पीछे किसी गुट या नेता की भूमिका को लेकर चल रही चर्चाओं की फिलहाल आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

कांग्रेस के सामने असली चुनौती—नई टीम को कितना सक्रिय बना पाएगी?

छत्तीसगढ़ कांग्रेस की प्रस्तावित नई PCC को केवल संगठनात्मक फेरबदल नहीं, बल्कि आने वाले राजनीतिक संघर्ष की तैयारी के तौर पर भी देखा जा रहा है। पदों की संख्या कम करना, युवा और महिलाओं को आगे लाना, प्रदर्शन को आधार बनाना और ब्लॉक स्तर तक प्रशिक्षण देना—इन सभी फैसलों का मकसद संगठन को अधिक सक्रिय और जवाबदेह बनाना नजर आता है। लेकिन चुनौती यह होगी कि नई टीम बनने के बाद क्या प्रदेश कांग्रेस वास्तव में जिला, ब्लॉक और बूथ स्तर तक सक्रियता बढ़ा पाती है। क्योंकि पदों की संख्या घटाना आसान है, लेकिन कम पदों वाली टीम से ज्यादा काम कराना ही इस संगठनात्मक बदलाव की असली परीक्षा होगी।

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